यूपी शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ेगा? 9 साल बाद सरकार ने शुरू की तैयारी UP Shiksha Mitra Salary Increase News

Published on: January 31, 2026
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UP Shiksha Mitra Salary Increase News: उत्तर प्रदेश में काम कर रहे शिक्षामित्रों के मानदेय को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार करीब नौ साल बाद शिक्षामित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। यह अपडेट सीधे तौर पर उन 1.47 लाख शिक्षामित्रों के लिए है, जो प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में लंबे समय से पढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही लगभग 28 हजार अनुदेशक भी इस फैसले से प्रभावित हो सकते हैं। अभी शिक्षामित्रों को हर महीने 10,000 रुपये मानदेय मिलता है, जो वर्ष 2017 से अब तक नहीं बढ़ा है। मौजूदा महंगाई और खर्चों को देखते हुए यह मुद्दा फिर से सामने आया है। सरकार के स्तर पर मानदेय बढ़ाने को लेकर सैद्धांतिक चर्चा हो चुकी है, जिससे यह साफ है कि मामला सिर्फ मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नीति स्तर पर भी इसे देखा जा रहा है।

बता दें इस अपडेट से जुड़े फैसले का असर उन सभी शिक्षामित्रों पर पड़ेगा, जो वर्षों से नियमित शिक्षकों के साथ स्कूलों में पढ़ाने का काम कर रहे हैं। इस लेख में आगे यह समझने में मदद मिलेगी कि मानदेय बढ़ाने को लेकर अब तक क्या संकेत मिले हैं, कितनी बढ़ोतरी पर विचार हो रहा है और सरकार की ओर से आगे क्या प्रक्रिया हो सकती है। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि यह फैसला कब तक लागू हो सकता है और इसमें बजट की क्या भूमिका रहने वाली है।

मानदेय बढ़ाने को लेकर क्या चर्चा चल रही है

सरकारी स्तर पर जो जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार शिक्षामित्रों के मानदेय में कम से कम 2000 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी पर विचार किया जा रहा है। अभी यह सिर्फ सैद्धांतिक सहमति के स्तर पर है। अंतिम निर्णय बजट की उपलब्धता और वित्तीय स्थिति को देखते हुए लिया जाएगा। सरकार यह आकलन कर रही है कि कितनी राशि बढ़ाना व्यावहारिक होगा, ताकि लंबे समय तक इसका भुगतान किया जा सके।

2017 के बाद नहीं बढ़ा मानदेय

बता दें शिक्षामित्रों के मानदेय में आखिरी बार बढ़ोतरी वर्ष 2017 में की गई थी। उस समय मानदेय 3500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रतिमाह किया गया था। इसके बाद से करीब नौ साल बीत चुके हैं, लेकिन इस दौरान मानदेय में एक रुपये की भी वृद्धि नहीं हुई। इसी वजह से शिक्षामित्र लगातार अपनी मांग को अलग-अलग मंचों पर रखते रहे हैं।

मानदेय को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी उठती रही मांग

पिछले कुछ वर्षों में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के विधायकों ने कई बार शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने का मुद्दा उठाया है। विधानसभा से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों तक यह मांग सामने आती रही है। विधायकों का कहना रहा है कि शिक्षामित्र शिक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी हैं और उन्हें सम्मानजनक मानदेय मिलना चाहिए।

शिक्षा मंत्री के बयान से बढ़ी उम्मीद

हाल ही में एक शिक्षक संघ के कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने शिक्षामित्रों के मानदेय को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि सरकार इस विषय को गंभीरता से देख रही है। इस बयान के बाद शिक्षामित्रों में यह उम्मीद जगी है कि सरकार जल्द ही इस पर कोई ठोस फैसला ले सकती है।

बजट के बाद हो सकता है अंतिम फैसला

फिलहाल मानदेय बढ़ाने को लेकर सभी स्तरों पर मंथन चल रहा है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि बजट में इसके लिए पर्याप्त प्रावधान कैसे किया जाए। माना जा रहा है कि बजट प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह हजारों शिक्षामित्रों के लिए बड़ी राहत साबित होगी और उनकी आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार आ सकता है। कुल मिलाकर, शिक्षामित्रों के मानदेय को लेकर चर्चा एक बार फिर सक्रिय हो गई है। अब सभी की नजरें सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में साफ हो सकता है।

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