8th Pay Commission Arrears Update: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों की नजर इन दिनों आठवें वेतन आयोग पर टिकी हुई है। सातवां वेतन आयोग 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो चुका है, लेकिन अब तक आठवें वेतन आयोग को लेकर सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लंबे समय से इंतजार कर रहे कर्मचारी यह जानना चाहते हैं कि नया वेतन आयोग कब लागू होगा और इसका असर उनकी सैलरी और पेंशन पर कब दिखाई देगा।
महंगाई के बीच बढ़ी चिंता और उम्मीद
पिछले कुछ समय से महंगाई लगातार बढ़ रही है। खाने पीने की चीजें, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा का खर्च पहले से ज्यादा हो गया है। ऐसे में सैलरी बढ़ने की उम्मीद कर्मचारियों के लिए राहत की उम्मीद बन गई है। देरी के कारण चिंता जरूर है, लेकिन कई कर्मचारी यह भी मान रहे हैं कि इस देरी का फायदा बाद में मिल सकता है।
देरी से कैसे बनता है एरियर
वेतन आयोग से जुड़ा नियम यह कहता है कि नया वेतन आयोग जिस तारीख से लागू माना जाता है, उसी तारीख से बढ़ी हुई सैलरी का हिसाब लगाया जाता है। आम तौर पर नया वेतन आयोग हर दस साल में आता है। पिछली बार सातवां वेतन आयोग जून 2016 में मंजूर हुआ था, लेकिन उसे 1 जनवरी 2016 से लागू माना गया था। इसी आधार पर यह उम्मीद की जा रही है कि आठवां वेतन आयोग भी 1 जनवरी 2026 से लागू माना जा सकता है।
एक साथ मिल सकता है बढ़ा हुआ भुगतान
अगर आठवां वेतन आयोग देर से लागू होता है और भुगतान बाद में शुरू होता है, तो कर्मचारियों को एरियर मिलेगा। यानी बढ़ी हुई सैलरी का पैसा एक साथ खाते में आएगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कर्मचारी की सैलरी में हर महीने 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी तय होती है और भुगतान 15 महीने बाद शुरू होता है, तो उसे करीब डेढ़ लाख रुपये एकमुश्त मिल सकते हैं। इसी वजह से कई कर्मचारी मान रहे हैं कि उनका पैसा सुरक्षित है और बाद में मिलेगा।
रिपोर्ट में कितना समय लगने का अनुमान
रेटिंग एजेंसी आईसीआरए की एक रिपोर्ट के अनुसार आठवें वेतन आयोग से जुड़ी प्रक्रिया में 15 से 18 महीने तक का समय लग सकता है। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों को करीब डेढ़ साल तक का एरियर एक साथ मिल सकता है। इससे कर्मचारियों को राहत मिलेगी, लेकिन सरकार पर एक ही साल में ज्यादा खर्च का दबाव भी बन सकता है।
पिछले वेतन आयोगों का अनुभव
पिछले अनुभव बताते हैं कि वेतन आयोग में देरी का असर सरकार के बजट पर पड़ता है। सातवें वेतन आयोग में सिर्फ छह महीने का एरियर दिया गया था, फिर भी वेतन खर्च में काफी बढ़ोतरी हुई थी। छठे वेतन आयोग में देरी ज्यादा हुई थी और ढाई साल से अधिक का एरियर देना पड़ा था। इसी वजह से आठवें वेतन आयोग को लेकर सरकार सोच समझकर फैसला ले सकती है।
फिटमेंट फैक्टर से तय होगी नई सैलरी
फिलहाल सातवें वेतन आयोग में कर्मचारियों को पे लेवल 1 से लेवल 18 तक रखा गया है। लेवल 1 की बेसिक सैलरी 18 हजार रुपये है, जबकि लेवल 18 की बेसिक सैलरी 2.5 लाख रुपये है। नई सैलरी फिटमेंट फैक्टर के आधार पर तय होती है। छठे वेतन आयोग में यह 1.92 था और सातवें में 2.57 रखा गया था। आठवें वेतन आयोग में इसके 2.15 रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
सैलरी बढ़ोतरी से क्या बदल सकता है
अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 रहता है, तो निचले स्तर के कर्मचारियों की सैलरी में अच्छा इजाफा हो सकता है। लेवल 1 की बेसिक सैलरी करीब 38 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं ऊंचे पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी भी काफी बढ़ सकती है। इससे महंगाई के असर को कुछ हद तक संभालने में मदद मिल सकती है।
कर्मचारियों और पेंशनधारकों को सलाह दी जाती है कि जब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक फैसला सामने न आए, तब तक किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें। वेतन आयोग से जुड़ी सही जानकारी के लिए सरकारी घोषणा का इंतजार करें। धैर्य रखना जरूरी है, क्योंकि फैसला देर से आए, लेकिन आने पर राहत मिलने की उम्मीद बनी हुई है।

