UGC New Rule: यूजीसी के नए नियमों को लेकर बड़ा घमासान, सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती

Published on: January 25, 2026
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UGC New Rules: उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव से जुड़े मुद्दों को लेकर यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियम अब कानूनी विवाद में आ गए हैं। हाल ही में अधिसूचित किए गए प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 के एक अहम प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस याचिका में यूजीसी के नियम 3(सी) को असंवैधानिक बताया गया है।

याचिकाकर्ता की दलील है कि नियम 3(सी) के तहत जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को केवल अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तक सीमित कर दिया गया है। इसके चलते सामान्य वर्ग से जुड़े लोगों को यदि किसी प्रकार के जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़े तो उन्हें औपचारिक शिकायत दर्ज कराने का अधिकार नहीं मिल पाता। याचिका में इसे संविधान के समानता और मौलिक अधिकारों से जुड़ी धाराओं के खिलाफ बताया गया है।

सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह इस नियम को असंवैधानिक घोषित करे और इसके अमल पर रोक लगाए। इसके साथ ही यह मांग भी की गई है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में बनाए गए सभी शिकायत निवारण तंत्र जाति निरपेक्ष हों और किसी भी वर्ग के व्यक्ति को भेदभाव की शिकायत करने से वंचित न किया जाए।

यूजीसी के ये नए दिशा निर्देश 15 जनवरी 2026 से देशभर के कॉलेजों विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू हो चुके हैं। नियमों के लागू होने के बाद छात्रों और शिक्षकों के बीच इसे लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कई लोगों का मानना है कि प्रावधान जरूरत से ज्यादा सख्त हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

इन नियमों की तैयारी से पहले संसद की शिक्षा महिला बाल और युवा मामलों से संबंधित स्थायी समिति ने यूजीसी के ड्राफ्ट नियमों की समीक्षा की थी। समिति ने दिसंबर 2025 में सरकार को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि ओबीसी वर्ग को भी जाति आधारित भेदभाव की श्रेणी में शामिल किया जाए। साथ ही यह सिफारिश भी की गई थी कि इक्विटी कमेटियों में वंचित वर्गों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।

समिति की सिफारिशों के आधार पर यूजीसी ने अंतिम नियमों में कई बदलाव किए और जनवरी 2026 में इन्हें अधिसूचित कर दिया। संशोधित नियमों में झूठी शिकायतों पर जुर्माने से जुड़े प्रावधान को हटाया गया जिससे इस विषय पर और अधिक बहस शुरू हो गई।

नए नियमों के अनुसार अब हर उच्च शिक्षण संस्थान में एक इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य होगा जिसमें अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग दिव्यांग और महिला प्रतिनिधि शामिल होंगे। भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के लिए चौबीसों घंटे सहायता व्यवस्था रखने और तय समय सीमा में जांच पूरी करने का प्रावधान किया गया है।

यदि किसी संस्थान द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो यूजीसी को उसकी मान्यता रद्द करने या फंडिंग रोकने का अधिकार होगा। यूजीसी का कहना है कि ये नियम पुराने दिशा निर्देशों का अद्यतन रूप हैं और इन्हें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

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