8th Pay Commission New Salary Formula: देश भर के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग के लागू होने का इंतजार है सिफर से लागू होने के साथी केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी होगी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर एक नया सुझाव सामने आया है, जिसमें सैलरी बढ़ाने के तरीके में बदलाव की बात कही गई है। इस प्रस्ताव के अनुसार सैलरी केवल एक बार संशोधित नहीं होगी, बल्कि हर साल उसमें बढ़ोतरी हो सकती है और फिटमेंट फैक्टर को भी नए ढांचे में लागू किया जा सकता है। यह सुझाव डाक कर्मचारियों के संगठन FNPO ने सरकार को भेजा है, जिस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
हर साल सैलरी बढ़ाने की मांग क्यों हो रही है
बता दें कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा सिस्टम में सैलरी बढ़ती जरूर है, लेकिन महंगाई के सामने वह कम पड़ जाती है। महंगाई भत्ता खर्चों में थोड़ी राहत देता है, लेकिन इनकम की ग्रोथ महसूस नहीं होती। सालाना 3 प्रतिशत इंक्रीमेंट अब काफी कम माना जा रहा है, खासकर तब जब निजी सेक्टर में वेतन कहीं तेजी से बढ़ रहा है।
वेतन आयोग का काम क्या होता है
जानकारी दे दें वेतन आयोग केंद्र सरकार द्वारा बनाया जाता है ताकि सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों की समीक्षा की जा सके। आमतौर पर हर 10 साल में नया वेतन आयोग बनता है। सातवां वेतन आयोग साल 2016 में लागू हुआ था और अब उसे लगभग एक दशक पूरा होने वाला है, इसलिए 8वें वेतन आयोग की चर्चा अपने आप तेज हो गई है।
अब तक वेतन आयोग कैसे बदलते आए हैं
कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी भारत में पहला वेतन आयोग आजादी से पहले बना था और इसके बाद समय-समय पर नए आयोग आते रहे। हर वेतन आयोग ने सैलरी सिस्टम में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। छठे वेतन आयोग में पे बैंड और ग्रेड पे आया, जबकि सातवें वेतन आयोग में पे मैट्रिक्स सिस्टम लागू हुआ, जिससे सैलरी तय करना ज्यादा आसान और साफ हो गया।
फिटमेंट फैक्टर को आसान भाषा में समझें
फिटमेंट फैक्टर एक नंबर होता है, जिससे पुरानी बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। सातवें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 रखा गया था। अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 18,000 रुपये थी, तो इसी फैक्टर से नई बेसिक सैलरी 46,260 रुपये बनती थी। कहां जाए की फिटमेंट फैक्ट्री एक ऐसा गुणन है जो कि कर्मचारियों की सैलरी निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
नए फिटमेंट फैक्टर में क्या बदलाव सुझाया गया है
बता दे FNPO ने सुझाव दिया है कि सभी कर्मचारियों के लिए एक ही फिटमेंट फैक्टर न रखा जाए। निचले लेवल के कर्मचारियों के लिए 3.0 फिटमेंट फैक्टर, मिड लेवल के लिए 3.05 से 3.10 और सीनियर लेवल के लिए 3.20 से 3.25 तक का प्रस्ताव रखा गया है। संगठन का कहना है कि निचले कर्मचारियों को सबसे ज्यादा वेतन नुकसान झेलना पड़ा है, इसलिए उन्हें ज्यादा फायदा मिलना चाहिए।
5 प्रतिशत सालाना इंक्रीमेंट पर जोर क्यों है
वर्तमान में अभी 3 प्रतिशत इंक्रीमेंट से सैलरी में कोई बड़ा फर्क नजर नहीं आता और कई कर्मचारी लंबे समय तक एक ही लेवल पर बने रहते हैं। अगर सालाना इंक्रीमेंट 5 प्रतिशत हो जाता है, तो हर साल सैलरी में साफ बढ़त दिखेगी। इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और सरकारी नौकरी की स्थिरता और आकर्षण दोनों बने रहेंगे। इसीलिए कर्मचारी यह मांग कर रहे हैं।
क्या मौजूदा पे मैट्रिक्स सिस्टम बदलेगा
इस प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि सातवें वेतन आयोग का पे मैट्रिक्स सिस्टम जारी रहना चाहिए। यह सिस्टम सैलरी तय करने में पारदर्शिता रखता है और अनावश्यक विवादों को कम करता है। यानी ढांचा वही रहेगा, लेकिन सैलरी बढ़ाने का तरीका बदला जा सकता है।
अगर ये सुझाव आगे चलकर लागू होते हैं, तो केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी हर साल बेहतर तरीके से बढ़ सकती है और निचले लेवल के कर्मचारियों को ज्यादा राहत मिल सकती है। बेसिक सैलरी बढ़ने से पेंशन पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। फिलहाल यह केवल मांग है और अंतिम फैसला सरकार और 8वें वेतन आयोग को लेना है, जिसमें अभी समय लग सकता है। हालांकि आयोग की सिफारिश में अगर इसे शामिल किया जाता है तो कर्मचारी के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।

